Thursday, October 21, 2010

आज नहीं वो मेरे पास

आज सुबह हुई दो लोगो की याद के साथ
जो आज नहीं मेरे साथ मेरे पास

कोई था जिसके कदम मदमस्त नाचते थे
कोई था जिसके खूब पक्के इरादे थे
जिसकी बोली में हमेशा एक चहक सी रहती थी
जिसके बातो में जेसे ठंडी हवा बहती थी

कोई था जो एकदम सीधा साधा था
कोई था जिसने किया आसमान छूने का वादा था
जिसकी आँखों में शांत सा समंदर था
जिसकी सोच में उसके दिल का दर्पण था


एक से मेरी होती लगभग हर दिन बात थी
दूसरे से बस होती सिर्फ मुलाकात थी
एक ने मुझे अपनी यादो में शामिल किया था
दूसरे ने सबके मन पे कब्ज़ा किया था

अचानक से आई आज उनकी याद
जो नहीं हैं आज किसी के भी साथ
एक ने खुद को मौत को बुला लिया
तो दूसरे को खुद मौत ने गले लगा लिया

कुछ अनकहे सवाल
कुछ उलझे से जवाब
ले गए वो लोग अपने जीवन के साथ

-लक्की
२१ अक्टूबर २०१०

Tuesday, September 28, 2010

यादें

कुछ लोग यूँ ही मिल जाते हैं अचानक से

कुछ साथ रह जाते हैं ज़िन्दगी भर के लिए

तो कुछ बस यूँ ही चलते हैं साथ पल दो पल के लिए

यादो में हम बस यूँ ही खो जाते हैं

जब वो लोग हमसे जुदा हो जाते हैं

कुछ के तो चेहरे भी धुंधला जाते हैं

पर कुछ हमारी आँखों में बस जाते हैं

कुछ दोस्त बनके हमारे आस पास नज़र आते हैं

तो कुछ यूँ ही परछाइयो में खो जाते हैं

कुछ की यादें हमें हर वक़्त हँसाती हैं

वही कुछ की यादें हमें आँसू दे जाती हैं

कुछ मिलते हैं हमारे रंग में खो जाते हैं

कुछ अपने जीवन के कुछ रंग हमें दे जाते हैं

कुछ जाने के बाद फिर मिल जाते हैं

कुछ जाते हैं, आते हैं, फिर चलें जाते हैं

यादें ही हैं जो साथ निभाती हैं

कभी हँसाती हैं तो कभी गुदगुदाती हैं

--लक्की

११ सितम्बर २००९

Saturday, September 25, 2010

कलम न हो जाना तू इतिहास !

कभी थी बिखेरती पन्नों पे कोई कहानी
कवि के कदमों पर कभी चली बेजुबानी
किसी के दुःख को बयाँ करती कभी
पथ प्रदर्शक बनती किसी की कभी

शब्दों की माला रच छू जाती किसी के मन को
कभी कोई समीकरण बन छू जाती प्रसिद्धि के शिखर को
डायरी के पन्नों पर कभी बिखेरती दिल की बातें
प्रेमी के हाथों पड़कर कभी बुनती सुनहरी बातें

मैं देखती हूँ हर जगह यूँ ही
एक भाव विहीन चेहरा नजर आता है
कलम तेरा जीवन
एक इतिहास नजर आता है

- लक्की शर्मा
१७ मई २०१०